शिमला, 4 अगस्त। हिमाचल प्रदेश के सभी बागवानों के हितों को ध्यान में रखते हुए तथा उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने के लिए मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर के निर्देशों के अनुसार आज मुख्य सचिव आर.डी. धीमान की अध्यक्षता में प्रगतिशील बागवानों और संबंधित सचिवों एवं विभागाध्याक्षों के साथ बैठक आयोजित की गई जिसमें बागवानों के हितों और सेब की फसल से संबंधित महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि राज्य सरकार ने सेब मंडी मध्यस्थता योजना के अंतर्गत् वर्ष 2021 मंे प्रापण किए गए सेब की लंबित राशि 8.59 करोड़ रूपये में से 4.15 करोड़ एचपीएमसी और 4.45 करोड़ रूपये हिमफैड को 30 जुलाई को जारी कर दिए हैं तथा प्रापण संस्थाओं एचपीएमसी और हिमफैड को आदेश दिए गए हैं कि वे बागवानों की लंबित राशि नगद में एक सप्ताह के भीतर जारी करना सुनिश्चित करें।
प्रवक्ता ने बताया कि बागवानी नीति में बदलाव करते हुए प्रदेश सरकार ने गत वर्षों की भांति विभिन्न प्रकार के कीटनाशकों के उपदान की पुरानी योजना पुनः लागू कर दी है जिसके अनुसार यह सारी वस्तुएं उद्यान विभाग के केन्द्रों के माध्यम से उपलब्ध होंगी।
उन्होंने बताया कि बागवानों से संबंधित उपकरण, एंटीहेल्नेट तथा अन्य संबंधित उपकरणों की अदायगी के लिए प्रदेश सरकार द्वारा उद्यान विभाग को 20 करोड़ रूपये जारी कर दिए गए हैं जिसे संबंधित जिलांे को आबंटित कर दिया गया है। जैसे ही इस राशि को व्यय कर लिया जाएगा, उसके तत्पश्चात अतिरिक्त बजट के प्रावधान करने की व्यवस्था भी कर दी जाएगी।
प्रदेश के सभी निजी सी.ए. स्टोर में लिए जाने वाले सेब के दाम तय करने की प्रक्रिया की निगरानी के लिए डा.वाई एस. परमार बागवानी विश्वविद्यालय, नौणी के कुलपति की अध्यक्षता में समिति का गठन किया गया है जिसमें संबंधित क्षेत्र के प्रगतिशील बागवानों को भी शामिल किया गया है ताकि सेब के दामों को तय करने की प्रकिया में पारदर्शिता लाई जा सके।
प्रदेश में सभी निजी सी.ए. स्टोर में बागवानों के सेब रखने के प्रावधान को समझौता ज्ञापन के अनुसार सखती से लागू करने के लिए उद्यान विभाग को कार्यवाही करने के लिए निर्देश दिए गए हैं।
प्रवक्ता ने आगे बताया कि प्रदेश में बागवानी विकास के लिए बागवानी बोर्ड स्थापित करने की र्प्रक्रिया प्रगति में है।
बागवानों को फल प्रसंस्करण इकाई व सी.ए. स्टोर स्थापित करने के लिए बागवानी विभाग द्वारा एकीकृत बागवानी विकास मिशन के अंतर्गत् 50 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त फल प्रसंस्करण इकाई एवं सी.ए. स्टोर स्थापित करने के लिए खाद्य प्रसंस्करण राज्य मिशन के अंतर्गत् उद्योग विभाग द्वारा 75 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान है।
प्रवक्ता ने सभी किसानांे, बागवानों, पंचायत समितियों, सहकारी समितियों से उन्होंने आग्रह किया कि वे संबंधित विभाग से संपर्क स्थापित करके उक्त योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में सभी बागवानों को पहली अप्रैल के बाद एचपीएमसी या खुले बाजार से सेब कार्टन एवं ट्रे करने पर उन्हें वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का 6 प्रतिशत उपदान दिया जाएगा। यह उपदान बागवानी विभाग एवं एचपीएमसी के माध्यम से उपलब्ध करवाने के लिए प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है। बागवान अपने नजदीकी उद्यान विभाग अथवा एचपीएमसी के कार्यालय में जाकर सभी औपचारिकताएं पूर्ण कर उक्त योजना का लाभ उठा सकते हैं।
उन्होंने बताया कि यह भी निर्णय लिया गया कि 6 प्रतिशत वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का लाभ अथवा उपदान सीधा बागवान के खाते में 15 दिन के भीतर जमा कर दिया जाएगा।
किसानों और बागवानों द्वारा उठाई गई मांगों पर विस्तृत चर्चा के लिए बैठक में विभिन्न क्षेत्रांे के प्रगतिशील बागवानों को भी आमंत्रित किया गया था।
बैठक में एपीएमसी के अध्यक्ष नरेश शर्मा, सुशांत देष्टा, पवन चौहान, विशाल चौहान और चेतन बरागटा ने भाग लिया।